Current Date:03 Jun 2026





टीएस सिंहदेव ने नवनियुक्त मंत्री राजेश अग्रवाल को दी बधाई: सोशल मीडिया पर लिखा-अब ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी को बचाने में मिलेगा सहयोग

पूर्व डिप्टी सीएम TS सिंहदेव ने मेटा पर नए मंत्री राजेश अग्रवाल को बधाई एवं शुभकामनाएं दी

टीएस सिंहदेव ने नवनियुक्त मंत्री  राजेश अग्रवाल को दी बधाई: सोशल मीडिया पर लिखा-अब ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी को बचाने में मिलेगा सहयोग
छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम TS सिंहदेव ने नए मंत्री राजेश अग्रवाल को बधाई दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने कहा कि, नए मंत्री राजेश अग्रवाल का सहयोग सरगुजा के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पहाड़ी को बचाने की मुहिम में क्षेत्रवासियों को मिलेगा। 
   दरअसल, टीएस सिंहदेव के करीबी रहे राजेश अग्रवाल ने साल 2017 में भाजपा ज्वाइन की थी। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को 94 मतों से हराकर पहली बार विधायक बने राजेश अग्रवाल ने बुधवार को मंत्री पद की शपथ ली।

उन्हें पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग आबंटित हुआ है। राजेश अग्रवाल को मंत्री बनाने में यह भी अहम पक्ष रहा कि उन्होंने टीएस सिंहदेव जैसे दिग्गज नेता को हराया था। 

रामगढ़ को बचाने की मुहिम में मिलेगा सहयोग

पूर्व डिप्टी सीएम TS सिंहदेव ने अपने मेटा एकाउंट पर नए मंत्री राजेश अग्रवाल को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।


उन्होंने लिखा है कि, आशा करता हूं कि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के दायित्वों का निर्वहन करते हुए सरगुजा का ऐतिहासिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर, रामगढ़ पहाड़ी को बचाने की मुहिम में अब उनका भी सहयोग क्षेत्रवासियों को मिलेगा।

कोल ब्लॉक की मंजूरी से रामगढ़ पर संकट

दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने हसदेव क्षेत्र के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी देने की तैयारी कर ली है। यह कोल ब्लॉक ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ से लगा हुआ है। एलिफेंट कारीडोर से 10 किलोमीटर की सीमा में होने के कारण पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने इस कोल ब्लॉक की अनुमति रोक दी थी। अब इसे एलिफेंट कारीडोर से 11 किलोमीटर की दूरी पर बताकर वनविभाग ने कोल ब्लॉक के वन भूमि के डायवर्सन की अनुशंसा कर दी है।

पूर्व डिप्टी सीएम TS सिंहदेव ने प्रदेश सरकार पर आंकड़ों में हेरफेर कर केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को अनुमति देने का गंभीर आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार के इस कदम से सरगुजा की सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत के साथ ही लेमरू हाथी प्रोजेक्ट के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है।

सिंहदेव ने कहा कि साल 2020-21 में प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वन विभाग से सर्वे कराने के बाद पाया था कि रामगढ़ पर्वत केते एक्सटेंशन कोल माइंस के 10 किलोमीटर के दायरे में आता है। माइंस के माइंस के कारण इस ऐतिहासिक धरोहर पर संकट आ जाएगा। 

99 फीसदी हिस्सा है वनक्षेत्र

टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया है कि, राजस्थान सरकार की आड़ में अपने पूंजीपति मित्रों के लाभ के लिए आंकड़ों में हेराफेरी करते हुए रामगढ़ पर्वत को खदान से 11 किमी की दूरी को 10 किलोमीटर बताते हुए केते एक्सटेंशन खदान को हरी झंडी दे दी है।

केते एक्सटेंशन परियोजना के 1762.83 हेक्टेयर भूमि  में से मात्र 16.95 हेक्टेयर भूमि ही खुली भूमि है। शेष 1745.88 हेक्टेयर भूमि फारेस्ट लैंड है। केते एक्सटेंशन का अधिग्रहण क्षेत्र घना जंगल है। टीएस सिंहदेव के अनुसार इस क्षेत्र में 4 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे, जिसका दूरगामी असर मध्य छत्तीसगढ़ के पर्यावरण पर पड़ेगा ।