Current Date:03 Jun 2026





जेसीसीजे अध्यक्ष अमित जोगी ने टीएस सिंहदेव के डिप्टी सीएम बनने पर छत्तीसगढ़ वासियों के मनोभावों को किया प्रकट इस बार घोषणा पत्र नहीं शपथ पत्र मांग रही जनता

जोगी कांग्रेस का एकमात्र उद्देश दोनों राष्ट्रीय दलों के प्रति इस अविश्वस्नीयता को समाप्त करना है- अमित जोगी

जेसीसीजे अध्यक्ष अमित जोगी ने टीएस सिंहदेव के डिप्टी सीएम बनने पर छत्तीसगढ़ वासियों के मनोभावों को किया प्रकट इस बार घोषणा पत्र नहीं शपथ पत्र मांग रही जनता
छत्तीसगढ़ टुडे 24 ब्यूरो राजीव कश्यप
छत्तीसगढ़ की एकमात्र मान्यता प्राप्त पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते मुझे “सिद्धांत और संसाधन” के बीच चुनाव करना पड़ रहा है- 
(1) या तो मैं अपने स्वर्गीय पिता श्री अजीत जोगी जी के “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” के सपने को साकार करने में संसाधनों के घोर अभाव के बावजूद उनके क्षेत्रीयवाद के लक्ष्य को ज़िंदा रखने के लिए अपने दम पर पूरे प्रदेश में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ूँ। 
(2) या तो मैं स्वर्गीय अजीत जोगी जी के सिद्धांतों से समझौता करके किसी भी राष्ट्रीय स्तर की ग़ैर-कांग्रेसी, ग़ैर-भाजपाई पार्टी से उनके द्वारा स्थापित पार्टी का विलय कर लूँ ताकि हमें कांग्रेस और भाजपा के विरुद्ध चुनाव लड़ने में संसाधनों की कमी न पड़े। 
इन दोनों विकल्पों पर मैंने पिछले एक महीने से गहन चिंतन किया है। मैंने भारत के राष्ट्रपति से लेकर 12 राज्यों के मुखमंत्रियों और अनगिनत मंत्रियों-सांसदों-विधायकों तक, देश के लगभग सभी नेताओं के साथ गहन चिंतन-मंथन किया, जिसमें लगभग सभी दलों के नेता शामिल हैं। 
सबकी बातों को सुनकर और समझकर मैं इसी निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि अगर स्वर्गीय श्री अजीत जोगी जी के “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” सपने को साकार करना है, तो उनके द्वारा स्थापित छत्तीसगढ़ की प्रथम और एकमात्र पार्टी “जोगी कांग्रेस” को बिना किसी दल से विलय करते हुए, उन्हीं के बताये रास्ते में हमें तमाम चुनौतियों के अवरोधकों के बावजूद निरंतर आगे बढ़ना होगा- इस दृढ़ विश्वास के साथ कि “मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया।” 
मैं किसी भी क़ीमत पर स्वर्गीय श्री सुन्दरलाल शर्मा, बैरिस्टर छेदीलाल, श्री खूबचंद बघेल, श्री ताराचंद साहू, दाऊ कल्याण सिंह, श्री परसराम यदु और श्री रामाधार कश्यप के उत्तराधिकारियों की भूल को कदापि नहीं दोहराऊँगा और न ही उनके खून-पसीने से बनाई क्षेत्रीय पार्टियों का व्यक्तिगत लाभ पाने के लिए किसी भी राष्ट्रीय दल में विलय करूँगा, भले ही पूरे प्रदेश में हमारी पार्टी को एक भी सीट न मिले। हमारी लड़ाई सिद्धांतों की है न कि संसाधन और सत्ता की। क्योंकि मुझे पूरा विश्वास है कि अगर सैद्धांतिक रूप से छत्तीसगढ़ की जनता हमारी बातों से सहमत हो गई, तो दुनिया की कोई भी ऐसी ताक़त पैदा नहीं हुई है जो हमें हमारे सिद्धांतों की पूर्ति करने के लिए संसाधनों और सत्ता, दोनों से वंचित रख सके। यही तो हमारे लोकतंत्र की खूबी है!
चुनावी समर में मैं किसी भी दल की आलोचना नहीं करूँगा। आगामी 4 महीनों में मैं और मेरे साथी आपके समक्ष सिर्फ़ हमारे पुरखों के “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” सपना को साकार करने का एक विस्तारपूर्वक, सकारात्मक, वैज्ञानिकी, समय-बद्ध ब्ल्यू-प्रिंट और रोड-मैप प्रस्तुत करेंगे। क्योंकि किसी भी प्रकार की नकारात्मकता- भेद-भाव- की सद्गुरू कबीर साहेब, गुरु घासीदास और शहीद वीर नारायण सिंह की छत्तीसगढ़ की इस तपोभूमि में कोई जगह नहीं हो सकती।
मेरे स्वर्गीय पिता जी के पदचिह्नों पर आगे बढ़के मैं इस रोड-मैप को एक क़ानूनी हलफ़नामा (शपथ पत्र) के रूप में उच्च न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से दाखिल करूँगा ताकि कोई भी नागरिक जो छत्तीसगढ़ का मतदाता है, मेरे विरुद्ध इस रोड-मैप की समय-बद्ध पूर्ति न करने के कारण न केवल क़ानूनी कार्यवाही कर सके बल्कि मेरा जुर्म सिद्ध होने पर मुझे दो साल के कठोर कारावास की सजा भी दिला सके। अपने मतदाताओं को ऐसा अधिकार किसी भी दल ने दुनिया के इतिहास में आज तक नहीं दिया है। 
मेरे स्वर्गीय पिता जी के बाद मैं देश में पहला ऐसा व्यक्ति रहूँगा जो चुनाव के पूर्व हलफ़नामा दाखिल करने जा रहा है क्योंकि मुझे अपने पिता जी की स्वप्न-दृष्ठा और ख़ुद की सोच में भरोसा है कि आने वाले 5 सालों में हम छत्तीसगढ़ को देश के अन्य सभी राज्यों से हर पैमाने में 4 गुना आगे ले जा सकते हैं और राज्य निर्माण की 25वीं  सालगिरह के उपलक्ष्य पर भारत की प्रगति का हर पैमाने- विशेषकर प्रति व्यक्ति आय (per capita income)- में सबसे विकसित और धनाढ्य राज्य बना सकते हैं। सरल शब्दों में कहूँ तो स्वर्गीय श्री अजीत जोगी के रास्ते में चलके आने वाले ५ सालों में छत्तीसगढ़ की अमीर धरती के गरीब लोग देश के सबसे अमीर लोग बन सकते हैं।

किंतु राज्य निर्माण के 23 साल बीत जाने के बावजूद हमारा छत्तीसगढ़, देश के अन्य सभी राज्यों में स्कूली-शिक्षा, उच्च-शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, नल-जल, सिंचाई, सड़क निर्माण और स्टेट-GST जैसे अति-महत्वपूर्ण पैमानों में देश के राज्यों में आख़िरी स्थानों में शामिल है। इसका कारण हमारे प्रदेश के नेताओं की लालच की परिपूर्णता और  दूरदृष्टि (विज़न) का अभाव ही है!
15 साल भाजपा और 5 साल कांग्रेस की छत्तीसगढ़ की सत्ता में रहने के बावजूद वादा-ख़िलाफ़ी, लाल-फ़ीताशाही और व्यापक भ्रष्टाचार के कारण दोनों राष्ट्रीय दलों के प्रति प्रदेश की आम जनता की विश्वसनीयता लगभग समाप्त हो गई है। अतः सबसे पहले तो हमें एक नये क्षेत्रीय विकल्प के रूप में उभरकर राजनीति के प्रति इस घातक अविश्वस्नीयता को दूर करना होगा।
जोगी कांग्रेस का एकमात्र उद्देश दोनों राष्ट्रीय दलों के प्रति इस अविश्वस्नीयता को समाप्त करना है। अगर किसी भी दल के नेताओं की ‘कथनी और करनी’ में जरा सा भी फ़र्क़ होता है, तो तत्काल ऐसे नेताओं की जवाबदेही तय हो और उन सबके विरुद्ध कोई भी प्रदेश का आम नागरिक सज़ा दिलाने के लिए पूरी तरह से क़ानूनी कार्यवाही करने में पूर्णतः सक्षम रहे। 
जब तक नेता अपने मतदाताओं को हलफ़नामे (शपथ पत्र) के माध्यम से ये वैधानिक अधिकार नहीं देते, तब तक उनकी किसी भी घोषणा को गंभीरता से लेना सद्बुद्धि और समय, दोनों की बर्बादी होगी।
चुनाव में मात्र 5 महीने बचे हैं। छत्तीसगढ़ की जनता अपने नेताओं से घोषणा पत्रों (Manifesto) की बेतुकी तामझाम नहीं बल्कि हलफ़नामा (शपथ-पत्र/ Affidavit) की अपेक्षा रखती है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के पिछले 15 सालों में उन्हें मन-लुभावन घोषणा पत्रों के नाम पर केवल और केवल धोखा के अलावा कुछ भी तो नहीं मिला है।