Current Date:03 Jun 2026





भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय को मिली अहम जिम्मेदारी,राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की घोषणा,विधानसभा चुनाव से पहले बड़े बदलाव, कहीं ऐसा तो नहीं की प्रदेश में आदिवासी

भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय को मिली अहम जिम्मेदारी,राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की घोषणा,विधानसभा चुनाव से पहले बड़े बदलाव, कहीं ऐसा तो नहीं की प्रदेश में आदिवासी
रायपुर।छत्तीसगढ़ सहित 5 राज्यों के चुनाव के मद्देनजर अब भाजपा चुनावी तैयारी में पूरी तरह से जुट गई है।वहीं बीते दिनों भाजपा नेतृत्व ने कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपनी नई कार्यसमिति सदस्यों की टीम घोषित कर दी है।राष्ट्रीय कार्यसमिति की नई टीम में छत्तीसगढ़ प्रदेश से भाजपा के दो बड़े चेहरे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री विष्णुदेव साय एवं धरम लाल कौशिक को शामिल किया गया है।आप को बता दें की प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर राजनीतिक गलियारों में बड़े मायने निकाले जा रहे हैं।विष्णु देव साय को कार्य समिति सदस्य में मुहर लगने के बाद पार्टी महासचिव अरुण सिंह ने उनके नाम की घोषणा की है।साय संघ के भी करीबी हैं,विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ बीजेपी के 3 बार प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व निभा चुके हैं,इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाए गए हैं,उनकी निष्ठा को देखते हुए अब राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।छत्तीसगढ़ में साय की छवि एक बेदाग नेता के रूप में है।आप को बता दें की विष्णु देव साय 2 बार विधायक और 20 साल तक सांसद रहे हैं।2019 के लोकसभा चुनाव में जब कुछ सांसदों के टिकट काटने की बात आई तो साय ने सबसे पहले अपना नाम आगे कर दिया। रायगढ़ लोकसभा उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।इसका केंद्रीय नेतृत्व पर असर अच्छा पड़ा।इससे पहले विष्णु देव साय 2006 से 2013 तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में श्रम रोजगार, खान एवं इस्पात राज्य मंत्री थे।



आदिवासी सीएम का भी मुद्दा


छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री का मुद्दा भी समय-समय पर उठता रहा है। यह आवाज भाजपा के खेमे में भी कई बार उठ चुका है,आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ आदिवासी चेहरा को भी सामने ला सकती है।चुनाव से ठीक पहले आदिवासी नेता भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय को राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।जिसके अब कई मायने निकाले जा रहे हैं।भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय प्रदेश सहित राष्ट्रीय नेतृत्व में आदिवासी नेता के रूप में अलग ही पहचान बनाई हैं।इनके प्रदेशाध्यक्ष के कार्यकाल में दो बार छत्तीसगढ़ प्रदेश ने भाजपा की सरकार बनी थी।गौरतलब है की छत्तीसगढ़ में विधान सभा के चुनाव इसी साल नवंबर दिसंबर में हो सकते हैं,विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी–कांग्रेस का फोकस आदिवासी वोटर्स हैं। छत्तीसगढ़ की सियासत में ऐसा कहा जाता है की आदिवासी वोटर जिस पार्टी के साथ जाता है राज्य में उसकी सरकार बनती है,मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ की कुल आबादी करीब 2.75 करोड़ है। जिसमें 34 फीसदी आदिवासी वोटर्स हैं।विधानसभा चुनाव में आदिवासियों के लिए 29 सीट आरक्षित की गई हैं।इन 29 सीटों को छोड़कर भी कई ऐसी सीटें हैं जहां आदिवासी वोटर्स हार जीत में अहम फैक्टर निभाते हैं, यही कारण है की दोनों पार्टियां आदिवासियों पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।