Current Date:03 Jun 2026





नंदोला देवी धाम से जल उठा हजारों श्रद्धालुओं ने स्वयं प्रकट श्री बंजारीनाथ धाम बरडीह में किया जलाभिषेक

जगह जगह कांवरियों का किया गया स्वागत भगवामय में रंग में रमा समुचा अंचल

नंदोला देवी धाम से जल उठा हजारों  श्रद्धालुओं ने स्वयं प्रकट श्री बंजारीनाथ धाम बरडीह में किया जलाभिषेक
राजकुमार सिंह/लुंड्रा:-
लुण्ड्रा के रियासत कालीन व अपनी शक्ति को लेकर जाने जाना  वाली प्रसिद्ध देवी धाम डडगांव जिसे मां नंदोला रानी के रूप में जाना जाता है यहां से कुछ उत्साही युवा धर्म प्रेमियों के द्वारा वरिष्ठों के सहयोग से आज से 5 वर्ष पूर्व 2019 में एक छोटे से स्वरूप में चालू किए गए लगभग 8 से 10  किलोमीटर दूर पैदल चल कांवड़ यात्रा का शुभारंभ किया गया था जो अब धीरे-धीरे एक बड़ा रूप लेते जा रहा है ज्ञात हो कि जहां 100 से 2 ,3 सौ तक की संख्या में  चलने वाला यह यात्रा आज बढ़कर हजारों में पहुंच गई है इसी तारतम्य में सावन सोमवार के पांचवीं सोमवार को डडगाव नंदोला धाम स्थित गगर नदी से  पवित्र जल  लेकर हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन पैदल यात्रा करते हुए तथा बोल बम व शिव शक्ति के गगनभेदी उद्घोष के साथ  महिला पुरुष बूढ़े बच्चे का यह जत्था स्वयं प्रकट श्री बंजारीनाथ धाम बरडीह के लिए रवाना हुआ  सेवाभावी लोगों एवं शिव शंकर सेवा समिति वह बोल बम सेवा समिति लुण्ड्रा के सदस्यों द्वारा यात्रा को लेकर व्यापक रूप से तैयारी की गई थी 5 से 6 डीजे के अलावा जगह जगह जलपान फल खीर खिचड़ी चाय इत्यादि की व्यवस्था भी की गई थी तथा कई जगह धर्म प्रेमी सेवाभावी व्यापारी व आम जनों ने भी अपने अपने स्तर पर जत्था के स्वागत का कार्यक्रम किया गया था
   कांवरियों का जत्था प्रातः जल उठा नाचते गाते झूमते एवं भोलेनाथ के मस्ती में मस्त होकर बरडीह बंजारी नाथ शिव मंदिर  पहुंच विधि विधान से पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया श्रद्धालुओं के मंदिर में पहुंचने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा इस दौरान समूचा लुण्ड्रा अंचल भक्ति से सराबोर हो भगवामय माहौल में रम गया था


  बंजारीनाथ धाम बरडीह परिसर में बोल बम सेवा समिति लुंड्रा के सदस्यों द्वारा खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया गया । इसके अलावा  भाजपा मण्डल लुण्ड्रा  एवं धौरपुर मण्डल के द्वारा फलाहार की व्यवस्था की गई थी।

स्वयं प्रकट के साथ आकार भी बढ़ रही है शिवलिंग की


 श्री बंजारीनाथ धाम के पुजारी एवं पुराने स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है अर्थात यह स्वयं प्रगट हुवा है इसे स्थापित नहीं किया गया है । ऊक्त मंदिर में पूजा उपासना की एक प्राचीन पारंपरिक मान्यता भी है आगे उन्होंने बताया कि शिवलिंग का आकार शने: शने:  बढ़ रही है पहले यह शिवलिंग का आकार छोटा था जो किंतु वह बड़ा हो रहा हैमान्यता है कि यहां सच्चे ढंग से मांगने से लोगों की हर मनोकामनाएं पूरी होती है।