Current Date:03 Jun 2026





तो क्या छत्तीसगढ़ में भी सिंधिया या शिंदे जैसी होगी टी एस सिंहदेव की भुमिका

खुले मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तारीफ और टीएस सिंह देव की केंद्र की तारीफ कई ऐसे अनसुलझे सवाल जो दे रहे आशंकाओं को जन्म

तो क्या छत्तीसगढ़ में भी सिंधिया या शिंदे जैसी होगी टी एस सिंहदेव की भुमिका
छत्तीसगढ़ टुडे 24 ब्यूरो राजीव

भाजपा द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव हेतु उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी करने के साथ ही भाजपा एक बार फिर कॉंग्रेस से बाजी मारती हुई दिख रही है। पहले 21 फिर 64 यानि कुल 90 में से 85 सीटों में भाजपा ने छत्तीसगढ़ में आचार संहिता लगते ही अपने उम्मीदवारों को चुनावी समर में उतार दिया है। पिछले 16 अगस्त को 21 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के लगभग 50 दिन बाद दूसरी सूची के आने के दौरान देश में कई बड़े घटनाक्रम हुए जैसे जी 20 का वैश्विक सम्मेलन, लोकसभा में पांच दिनों का विशेष सत्र, चन्द्रयान-3 का प्रक्षेपण इत्यादि। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विदेशी दौरों सहित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के कारण बीजेपी को छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों के अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी करने में हुई देरी स्वाभाविक थी। भाजपा की पहले प्रत्याशी घोषित करने की चुनावी रणनीति और भी कारगर साबित होती यदि 64 उम्मीदवारों की अभी जारी सूची सितंबर के पहले सप्ताह में ही जारी हो जाती, फिर भी कॉंग्रेस की तुलना में भाजपा की तैयारी व रणनीति इस चुनाव में बेहतर दिखाई दे रही है। भाजपा के प्रत्याशी पहले घोषित करने के दाव का कॉंग्रेस के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है, कॉंग्रेस पार्टी अभी तक अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने की स्थिति में भी नहीं है। सत्तारूढ़ कॉंग्रेस पार्टी को अपने अंदरूनी सर्वे में प्राप्त कमजोर रिपोर्ट कार्ड वाले विधायकों व मंत्रियों के टिकट काटने में जहाँ पसीना आ रहा है वहीं बीजेपी नए पुराने का तालमेल बैठाकर टिकट बांटने में बाजी मार ले गई है तभी तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव मूंछों में ताव देकर कह रहे हैं कि युवा जोश और अनुभव मिल कर इस बार कमाल करेंगे और कमल खिलायेंगे।  भाजपा की 90 में से अब केवल 5 सीटें ही बची हैं जिनमें उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है, और उनमें से एक है अंबिकापुर विधानसभा की महत्वपूर्ण सीट जहाँ से उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव विधायक हैं। अंबिकापुर विधानसभा को टी एस सिंह देव लगातार तीन बार से जीतते आ रहे हैं, ऐसे में भाजपा की ओर से जारी की गई प्रत्याशियों की दोनों सूची में अंबिकापुर सीट से किसी का नाम न होना आश्चर्यचकित तो करता है किंतु आप इसे बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की दूरगामी रणनीति का हिस्सा समझें तो बेहतर होगा। हालांकि लोगों की राय है कि अंबिकापुर जैसी कठिन सीट को जीतने के लिए बीजेपी को यहाँ भी डेढ़ महीने पहले ही प्रत्याशी घोषित करने की आवश्यकता थी ताकि प्रत्याशी गांव-गांव तथा घर-घर पहुंच जनसंपर्क कर अपनी स्थिति मजबूत कर सके परंतु ऐसा नहीं हुआ। पहली ही लिस्ट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ़ पाटन विधानसभा से सांसद विजय बघेल का नाम एक झटके में तय करने वाली बीजेपी को अंबिकापुर सीट पर नाम तय करने में माथापच्ची करनी पड़ रही है ये स्वीकार करना कठिन है। छत्तीसगढ़ में पिछले एक डेढ़ साल के राजनीतिक घटनाक्रम पर यदि नज़र डालें तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव के बीच की तल्खी जब ज्यादा बढ़ी हुई थी तब कॉंग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा की मध्यस्थता से दोनों को साथ लाने के प्रयास हुए जिसमें टी एस बाबा को  उपमुख्यमंत्री बनाकर संतुष्ट करने का दाव भी था परंतु उपमुख्यमंत्री बनने के बाद भी टी एस सिंह देव जहाँ एक ओर अपनी ही सरकार को लेकर मुखर रहे तो वहीं दूसरी ओर वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करने से भी नहीं चूके। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते रहे कि केंद्र ने हमारा पैसा नहीं दिया तो टी एस ने रायगढ़ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने कह दिया हम जितना मांगते हैं मोदीजी उससे ज्यादा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी मंच पर भूपेश सरकार की बुराई तो करते रहे परंतु उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव की व्यक्तिगत रूप से प्रशंसा भी की, आख़िर क्यूँ,,? यही वो सवाल है जिसका जवाब ढूंढने की कोशिशें हो रही हैं। अंबिकापुर विधानसभा जैसी महत्वपूर्ण सीट पर अब तक बीजेपी उम्मीदवार का नाम तय न हो पाने को भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और टी एस बाबा के बीच की अच्छी केमिस्ट्री से जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी से बाबा के नजदीकियों की चर्चा लंबे समय से चल रही है, तो क्या अब इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है ? विधानसभा चुनाव को लेकर देश की मीडिया और बीजेपी के अपने अपने सर्वे रिपोर्ट बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सीटें बढ़ती हुई तो दिखाई दे रही हैं परंतु बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे है। भाजपा की सरकार बनाने के लिए क्या इसी की भरपाई के लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव को साधा है? क्या छत्तीसगढ़ के सिंधिया या शिंदे होंगे टी एस ?? यदि तथ्यों और नेताओं के ताजा बयानों पर नज़र डालें तो कोई आश्चर्य नहीं कि विधानसभा चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बने और टी एस सिंह देव उस सरकार में अपने समर्थक विधायकों सहित शामिल हों!! मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जो सफल प्रयोग बीजेपी ने सरकार बनाने के लिए किया उसे छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने दोहराया तो बीजेपी की सरकार बनना तय समझिए।
बहरहाल, 2024 को साधने के लिए 2023 की लड़ाई जीतना भाजपा के लिए अत्यंत जरूरी है और इसमें छत्तीसगढ़ सबसे अहम है।

✍आलेख-
संतोष दास सरल
राजनीतिक विश्लेषक