आज दिनांक 23.08.2023 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बिकापुर के अध्यक्ष श्री आर. के. तिवारी के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अम्बिकापुर के सचिव श्री अमित जिन्दल ने बालक संप्रेक्षण गृह अम्बिकापुर में जांच / विजिट की और विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन कर उपस्थित लोगो को बताया कि बच्चे किसी भी राष्ट्र का भविष्य है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 में चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चे को किसी कारखाने या खान या खतरनाक काम में न लगाये जाने का प्रावधान है तथा अनुच्छेद 39 ई में बालको की सुकुमार अवस्था का दुरूपयोग रोकने का प्रावधान है तथा अनुच्छेद 39 एफ में बालको को स्वस्थ विकास के अवसर और सुविधाए दिये जाने का प्रावधान है तथा सविंधान की इन्ही भावनाओ को ध्यान रखते हुए नालसा (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाये और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाऐं) योजना 2015 लायी गई जिसमें बालको के सर्वोत्तम हित, बाल कल्याण की बात की गई तथा किशोरो को विधिक सेवा के माध्यम से अधिवक्ता दिए जाने का प्रावधान है तथा बच्चो के अधिकारो के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार का प्रावधान है। श्री जिन्दल ने बताया कि बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम के अनुसार किसी भी बालक से 3 घण्टे से ज्यादा लगातार काम नही कराया जा सकता जिसके बाद उसे आधे घन्टे के लिए आराम के लिए समय दिया जायेगा। श्री जिन्दल ने आगे बताया कि किसी भी बालक से रात्रि 7.00 बजे से प्रातः 8 बजे के मध्य कार्य कराया जाना अधिनियम में मना किया गया है और बालक को एक दिन का साप्ताहिक अवकाश दिया जाना आवश्यक है। बाल श्रम की समस्या को खत्म एवं संविधान के जनादेश की प्रभावोत्पादकता हेतु माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी एम. सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य 1996 में निर्देश दिया कि नियोजक को बालश्रम (निषेध एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1986 के उल्लंघन में 14 वर्ष से कम के बालक को खतरनाक कार्य में लगाने पर रू0 20,000/- का मुआवजा देना है तथा समुचित सरकार को ऐसे प्रत्येक बच्चे को जो खतरनाक काम में कार्यरत है, रू0 5,000/- अनुदान के रूप में देना है उक्त रकम 25,000/- को कोष में जमा करना होगा जो कि बालश्रम - पुनर्वास सह-कल्याण कोष के रूप में बच्चों के पुनर्वास में प्रयोग होगी।
