Current Date:24 Jun 2026





रोजगार की मांग पर भड़का भूस्वामियों का गुस्सा, 4 घंटे तक थमा कोयला परिवहन

14 दिनों के भीतर न्यायोचित समाधान के आश्वासन पर चक्का जाम हुआ समाप्त

रोजगार की मांग पर भड़का भूस्वामियों का गुस्सा, 4 घंटे तक थमा कोयला परिवहन

सीजी टुडे 24 ब्यूरो उजित ठाकुर  सूरजपुर/भटगांव

 महामाया खुली खदान परियोजना से प्रभावित भूस्वामियों और ग्रामीणों का लंबे समय से सुलग रहा आक्रोश मंगलवार को सड़क पर फूट पड़ा। भूमि के बदले रोजगार की मांग को लेकर प्रभावित परिवारों ने एसईसीएल भटगांव प्रबंधन के खिलाफ जरही-भटगांव मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन के चलते करीब चार घंटे तक कोयला परिवहन पूरी तरह ठप रहा, जिससे खदान क्षेत्र की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि परियोजना प्रभावित परिवारों को रोजगार देने के मामले में प्रबंधन दोहरी नीति अपना रहा है। उनका कहना था कि एक ही परियोजना के अंतर्गत कुछ परिवारों को एक नियम के आधार पर रोजगार प्रदान किया गया, जबकि अन्य पात्र परिवारों को अलग-अलग नियमों का हवाला देकर रोजगार से वंचित रखा जा रहा है।

भूस्वामियों के अनुसार लगभग 28 पात्र परिवार वर्षों से रोजगार की आस लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि परियोजना की जनसुनवाई और ग्राम सभाओं के दौरान स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित पात्र परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा तथा क्लबिंग का लाभ भी नियमानुसार दिया जाएगा। इसी प्रावधान के तहत कई लोगों को नौकरी मिली, लेकिन शेष पात्र परिवारों के मामलों में प्रबंधन का रवैया अलग होने से प्रभावितों में भारी नाराजगी है।

चक्काजाम की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और एसईसीएल प्रबंधन के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे तथा आंदोलनकारियों से चर्चा की। कई दौर की वार्ता के बाद अधिकारियों ने लंबित रोजगार प्रकरणों की समीक्षा कर 14 दिनों के भीतर न्यायोचित समाधान निकालने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

प्रशासन और प्रबंधन के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने फिलहाल धरना एवं चक्काजाम समाप्त कर दिया। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर रोजगार संबंधी लंबित मामलों का समाधान नहीं हुआ और सभी पात्र प्रभावित परिवारों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन को पुनः शुरू करते हुए और अधिक व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि परियोजना प्रभावित सभी पात्र परिवारों के अधिकारों और समान अवसरों की लड़ाई है। उन्होंने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि रोजगार से जुड़े सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण कर प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाया जाए, ताकि क्षेत्र में बढ़ते असंतोष को समाप्त किया जा सके।