सीजी टुडे24 राजीव कश्यप
आज दिनांक 3 नवंबर सोमवार को संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय, अंबिकापुर सरगुजा में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस एवं रजत जयंती महोत्सव 2025 के अवसर पर छत्तीसगढ़ी नक्शा के माध्यम से लोक-संस्कृति, कलाकृतियां एव महान विभूतियों की झलकियों से सजाया गया l
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं अभिनंदन से किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री राजेश अग्रवाल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा, कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राम लखन सिंह पैकरा, पूर्व प्रदेश महामंत्री भाजपा जनजातीय गौरव समाज ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री अमृतलाल ध्रुव अपर कलेक्टर सरगुजा; श्री अमोलक सिंह ढिल्लों अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा; श्री गिरीश गुप्ता जिला परियोजना अधिकारी, श्री अभय तिवारी यातायात पुलिस उपनिरीक्षक ,सुश्री बीके विद्या दीदी प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज सेवा केन्द्र; श्री राजेश सिंह सिसोदिया नंगे पांव सत्याग्रह , श्री मनोज गुप्ता, पार्षद राजमोहिनी वार्ड; श्री मंगल पाण्डेय निदेशक चिराग सोशल वेलफेयर सोसाइटी; श्री संतोष दास सरल साहित्यकार कवि, समाजसेवी,श्री अनिल कुमार मिश्रा, निदेशक छत्तीसगढ़ प्रचार-प्रसार विकास संस्थान; सुश्री श्री वंदना दत्ता वरिष्ठ समाजसेविका,श्रीमती हिना खान अध्यक्ष महिला बाल उत्थान सोसायटी; श्री आलोक शुक्ला, श्रीमती इंदु मिश्रा (उल्लास नवभारत साक्षरता), श्रीमती प्रीति तिवारी (स्वीप समिति) तथा श्री रजनीश मिश्रा, शालिनी शर्मा समिति सदस्य के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अंजन सिंह ने समस्त अतिथियों का स्वागत करते हुए आज आयोजित कार्यक्रम के औचित्य के सम्बन्ध में सम्बोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की रजत जयंती राज्य की प्रगति, समृद्धि और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि संत हरकेवल शिक्षा महाविद्यालय के संस्थापक पूज्य श्री श्री 108 संत केवल दास जी महाराज ने सरगुजा संभाग में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य करते हुए न केवल इस क्षेत्र का पहला सीबीएसई दिल्ली से संबद्ध विद्यालय स्थापित किया, बल्कि बी.एड. शिक्षा महाविद्यालय की स्थापना कर एक नवीन शैक्षिक दिशा दी। उनका यह प्रयास आज भी शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक मिसाल के रूप में स्थापित है।
कार्यक्रम की प्रस्तुतीकरण में बी.एड. तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षार्थियों द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के नक्शे की एक भव्य प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई, जिसमें राज्य को पाँच संभागों — सरगुजा, रायपुर, दुर्ग, कोरिया और बस्तर — में विभाजित कर प्रत्येक संभाग की भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को दर्शाया गया। सरगुजा संभाग के मैनपाट की सुंदरता, बलरामपुर के प्राकृतिक संसाधन, रायपुर के औद्योगिक विकास, दुर्ग की सांस्कृतिक विविधता, और बस्तर की जनजातीय परंपराओं को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की महान विभूतियों की झलकियों को भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया गया। शहीदों में वीर नारायण सिंह, बीर मुंडा, ध्रुव , और महेंद्र वर्मा की वीरता की कहानियाँ दिखाई गईं, वहीं वीरांगनाओं में रानी अवंतीबाई लोधी, रानी दुर्गावती, बिलासा बाई और राधा बाई के अदम्य साहस को मंचित किया गया। छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा के अंतर्गत तीजन बाई, प्रफुल्ल कुमारी, और विनोद कुमार शुक्ल जैसे कवियों एवं कलाकारों की रचनाओं को सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में पंडित रविशंकर शुक्ल, पंडित सुंदरलाल शर्मा, आत्मानंद और माधवराव स्प्रे के योगदान को विस्तार से बताया गया, जबकि समाज सुधार के क्षेत्र में संत गहिरा गुरु, गुरु घासीदास, और राजमोहिनी देवी के जीवन दर्शन और समाज में समानता, प्रेम और सत्य के संदेशों को उजागर किया गया। साथ ही, छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातियों जैसे गोंड, बैंगा, पहाड़ी कोरबा और उरांव समाज की परंपराओं, लोककथाओं और जीवनशैली की झलकियाँ भी प्रस्तुत की गईं, जिन्होंने सभी दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके पश्चात श्री राम लखन सिंह पैकरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी संस्कृति और जनजातीय अस्मिता में बसती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्रीय गौरव को बनाए रखते हुए शिक्षा और समाजसेवा के माध्यम से राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।
श्री अमोलक सिंह ढिल्लों ने सड़क सुरक्षा, नियमों के पालन और युवाओं में अनुशासन की भावना पर जोर देते हुए कहा कि जागरूक नागरिक ही सशक्त प्रदेश की पहचान होते हैं।
वहीं मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा ने साइबर क्राइम और साइबर सुरक्षा पर महत्वपूर्ण जानकारी दी और विद्यार्थियों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, डिजिटल जिम्मेदारी और सामाजिक नैतिकता का पालन करने की प्रेरणा दी। शिक्षा में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों को नई तकनीकों के प्रति सजग रहने का आग्रह किया।
सभी अतिथियों ने प्रशिक्षार्थियों द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ के नक्शे एवं कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की सराहना की।
कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन सिंह बाबरा एवं प्राचार्य डॉ. अंजन सिंह द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह और शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया।
संपूर्ण कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. अंजन सिंह के निर्देशन में तथा कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पूजा दुबे एवं सहायक प्राध्यापकों डॉ. सुमन पाण्डेय, डॉ. रानी पाण्डेय, श्रीमती चंदा सिंह, श्रीमती निरोध त्रिपाठी, श्रीमती श्वेता तिवारी सहित बी.एड. प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षार्थियों के सहयोग से अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की एकता, संस्कृति और शिक्षा के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनकर लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
