Current Date:01 Jun 2026





आज मनाया जाएगा राखी का त्यौहार,95 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा दुर्लभ संयोग

जानिये राखी बांधने का सही समय, विधि, मंत्र, उपाय, नियम सहित अन्य जानकारी

आज मनाया जाएगा राखी का त्यौहार,95 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा दुर्लभ संयोग
सीजी टुडे 24 राजीव कश्यप
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को सावन पूर्णिमा के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु, उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। इसके साथ ही भाई अपनी बहन को उपहार देने के साथ रक्षा करने का वचन देता है। ये पर्व देश के कोने-कोने में बहुत ही धूमधाम वह उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल रक्षाबंधन पर करीब 100 साल बाद ऐसा हो रहा है जब भद्रा और पंचक का साया नहीं रहेगा। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन कई गुना अधिक शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। आइए जानते हैं राखी बांधने का सही समय, विधि, मंत्र, उपाय, नियम सहित अन्य जानकारी...।

 *95 साल बाद रक्षाबंधन पर बना दुर्लभ संयोग, इन राशियों को कर सकता है मालामाल* 

रक्षाबंधन पर इस बार श्रावण नक्षत्र के साथ सौभाग्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है। रक्षाबंधन पर लगभग 95 वर्षों में एक बार होता है। आखिरी बार ऐसा संयोग 1930 के दशक में बना था। ऐसे में मेष, मिथुन और मीन राशि के जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है।

 _रक्षाबंधन पर कर्क राशि वाले करें ये उपाय_

भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें राखी, पान, दूर्वा व फूल अर्पित करें। इससे भाई के करियर में प्रगति होगी और नौकरी में पदोन्नति व मान-सम्मान मिलेगा।

 _रक्षाबंधन पर मिथुन राशि वाले करें ये उपाय_ 

भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल, सिंदूर, अक्षत और लाल फूल डालकर अर्पित करें। साथ ही भगवान शिव की पूजा करें। इससे भाई की सभी बाधाएं दूर होंगी।

 _रक्षाबंधन पर वृषभ राशि वाले करें ये उपाय_

वृषभ राशि की बहनें भगवान शंकर की विधिवत पूजा कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। इससे भाई-बहन के रिश्ते और मजबूत होंगे।

_रक्षाबंधन पर मेष राशि वाले करें ये उपाय_

इस राशि की बहनें भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करते हुए राखी चढ़ाएं और "ॐ गणेशाय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे भाई को सुख-समृद्धि मिलेगी और उसका क्रोध शांत होगा।

 *रक्षाबंधन पर भाई बहनों को न दें ये उपहार*

रक्षाबंधन पर भाई को बहन को चाकू, नुकीली वस्तुएं, फोटो फ्रेम या काले रंग की कोई भी चीज उपहार में नहीं देनी चाहिए, क्योंकि ज्योतिष में इन्हें अशुभ माना गया है। इसके बजाय, आप बहन को सोने या चांदी की कोई वस्तु भेंट कर सकते हैं,
जो शुभ और मंगलकारी मानी जाती है।

 *भाई को राशि के अनुसार बांधें राखी*

 *_मेषः लाल रंग की राखी_* 


 *वृषभः सफेद या सिल्वर रंग की राखी* 


 *मिथुनः हरे रंग या चंदन से बनी राखी* 


 *कर्क: सफेद रंग या मोतियों वाली राखी* 


 *सिंहः पीले, गुलाबी या सुनहरे रंग की राखी* 


 *कन्याः हरे या सफेद रेशमी राखी* 


 *तुलाः आसमानी, सफेद या क्रीम रंग की राखी* 


 *वृश्चिकः गुलाबी या लाल रंग की राखी* 


 *धनुः पीले रंग या रेशमी राखी*

 मकरः नीले, सफेद या सिल्वर रंग की राखी

 *कुंभः सिल्वर या पीले रंग की राखी

 *मीनः पीले रंग की राखी।*
 राखी बांधते समय सही दिशा

राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा और बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। राखी हमेशा भाई के दाहिने हाथ की कलाई में ही बांधनी चाहिए।

 भाई को इस रंग की न बांधे राखी...

वैदिक शास्त्र के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई को काले रंग के धागे से बनी या काले रंग वाली राखी ना बांधे 
ज्योतिष शास्त्र में काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस रंग की राखी खरीदने या बांधने से बचना चाहिए।
 राखी बांधने की सही विधि...
रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों। स्वच्छ वस्त्र पहनें और सबसे पहले देवी-देवताओं की पूजा करके उन्हें भी रक्षा सूत्र अर्पित करें।

शुभ मुहूर्त में चांदी, पीतल या किसी अन्य धातु की थाली में रोली, चावल, सिंदूर, मिठाई, राखी और दीपक सजा लें। पहले भगवान का ध्यान करें, फिर भाई को एक चौकी या ऊंचे स्थान पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं और उसके सिर पर रूमाल या कपड़ा रख दें।इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाए, फिर अक्षत लगाकर हल्के से ऊपर छिड़के और आरती उतारे। मंत्रोच्चार करते हुए भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें और मिठाई खिलाएं। भाई भी बहन को मिठाई खिलाकर उसके चरण स्पर्श करे, उपहार स्वरूप धन या कोई अन्य वस्तु भेंट करे और उसके सुखी व समृद्ध जीवन की कामना करे।
 रक्षाबंधनः कैसे लगता है भद्रा काल
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा की स्थिति से भद्रा काल का निर्धारण होता है। जब चंद्रमा कर्क, सिंह, कुंभ या मीन राशि में रहता है, तो भद्रा का वास पृथ्वी लोक में माना जाता है। चंद्रमा के मेष, वृषभ, मिथुन या वृश्चिक राशि में होने पर भद्रा स्वर्ग लोक में स्थित रहती है। वहीं, जब चंद्रमा कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में होता है, तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना जाता है।
 रक्षाबंधन होगा सावन का अंतिम दिन
श्रावण पूर्णिमा के साथ ये माह समाप्त हो जाएगा और भाद्रपद महीना आरंभ हो जाएगा। सावन पूर्णिमा पर शिव जी की विधिव पूजा करने का विधान है।

 रक्षाबंधन में भद्रा लगने पर क्यों  नहीं बांधते राखी?

शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने भद्रा को यह श्राप दिया था कि भद्रा काल में किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल नहीं होगा। इसी कारण रक्षाबंधन पर राखी बांधने जैसे मंगलकारी कार्य भी भद्रा काल में करना अशुभ माना जाता है।

 रक्षाबंधन पर भद्रा का साया

इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसा करीब 100 साल बाद हो रहा है। पंचांग के अनुसार, ऐसा संयोग 1925 को बना था। जब रक्षाबंधन पर भद्रा के साथ पंचक का साया नहीं था। बता दें कि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 02:12 बजे से आरंभ होकर 9 अगस्त को सूर्योदय से पहले 5:46 तक रहेगा।

रक्षाबंधन 2025 पर चौघड़िया मुहूर्त

लाभ काल- प्रातः 10:15 से दोपहर 12:00 बजे

अमृत काल-दोपहर 1:30 से 3:00 बजे

चर काल- सायं 4:30 से 6:00 बजे

 रक्षाबंधन 2025 शुभ मुहूर्त

 सर्वार्थ सिद्धि योग - 9 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 23 मिनट तक

 *ब्रह्म मुहूर्त-* सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 04 मिनट तक

 अभिजीत मुहूर्त-  दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

 सौभाग्य योग- सुबह 4 बजकर 8 मिनट से 10 अगस्त को तड़के 2 बजकर 15 मिनट तक

 श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि आरंभ- 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से

 श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि समाप्त -9 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर

 रक्षाबंधन 2025 तिथि उदया  तिथि के हिसाब से रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025

टीप- _कुछ जानकारी हमारे ज्योतिषाचार्य एवं कुछ अन्य माध्यम से एकत्रित किए गए हैं_