Current Date:28 Jun 2026





आदिवासियों के संरक्षण एवं अधिकारों के संबंध में आयोजित सेमिनार

अनुसूचित जाति एवं जनजाति का व्यक्ति को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त में विधिक सहायता एवं अधिवक्ता प्राप्त करने का है अधिकार ...

आदिवासियों के संरक्षण एवं अधिकारों के संबंध में आयोजित सेमिनार
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अंबिकापुर के अध्यक्ष तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राम कुमार तिवारी के निर्देश पर न्याय सदन में आदिवासियों के संरक्षण एवं अधिकारों के संबंध में सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें श्री नरेंद्र कुमार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भी उपस्थित थे उन्होंने बताया कि भारत के संविधान में अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक और आर्थिक हित और सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषणों से उनकी रक्षा के लिए विशेष प्रावधान हैं और बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 के अनुसार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्य को अखाद्य पदार्थ खाने या पीने के लिए मजबूर करना या उसे नग्न या अर्धनग्न करना उसकी जमीन पर कब्जा करना महिलाएओं पर अत्याचार करना या गाली-गलौज करना अपराध है इस अधिनियम की धारा 18 के अनुसार आरोपी को अग्रिम जमानत न मिलने का प्रावधान है। इस प्रकार के मामलों के लिए स्पेशल थाना स्पेशल कोर्ट का भी निर्माण किया गया है जहा ऐसे मामलों की सुनवाई की जाती है। कोई भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति का व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त में विधिक सहायता एवं अधिवक्ता प्राप्त कर सकता है। साथ ही नालसा ( आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण और प्रवर्तन के लिए विधिक सेवाएं) योजना 2015 की भी जानकारी दी गई।