एक ओर पूरे देश में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधरोपण, जागरूकता रैली और पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं लुण्ड्रा जनपद मुख्यालय में इस महत्वपूर्ण दिवस पर किसी भी प्रकार की उल्लेखनीय गतिविधि दिखाई नहीं दी।
जानकारी के अनुसार वन विभाग कृषि विभाग जनपद प्रशासन से लेकर अन्य शासकीय विभागों तक कहीं भी विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर कोई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। न तो पौधरोपण अभियान की तस्वीरें सामने आईं और न ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली कोई पहल नजर आई। इससे आम लोगों में चर्चा का विषय बना रहा कि जिस दिन पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की बात की जाती है, उसी दिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता स्पष्ट दिखाई दी जो पर्यावरण संरक्षण के नाम पर घोर लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर इसका किस कदर पालन हो रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर खंड मुख्यालय में एक भी कार्यक्रम नहीं हो पाया शासन प्रशासन द्वारा पर्यावरण को लेकर किस प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं की विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भी यहां तक की वन विभाग को भी एक वृक्षारोपण करने तक की फुर्सत नहीं है। विश्व पर्यावरण दिवस जैसे विश्व व्यापी कार्यक्रम के अवसर पर भी यदि विभाग सक्रिय नहीं दिखें तो पर्यावरण के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता पर सवालिया निशान उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ी विडम्बना तो यह है कि वर्तमान में स्थानीय जनपद स्तर में भाजपा की सरकार हैऔर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाया जा रहा है बावजूद अपने ही पार्टी की उपेक्षा करते हुए वह लंबी-लंबी डिगें हांकने वाले स्थानीय जन प्रतिनिधि भी जिस पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन को लेकर लंबी-लंबी डिगें हांकने में कोई कमी नहीं छोड़ते है वही स्थानीय जन प्रतिनिधि भी पर्यावरण दिवस के दिन को भुल गए ।
गौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि सतत प्रक्रिया है, लेकिन ऐसे विशेष दिवसों पर आयोजित गतिविधियां लोगों को जागरूक करने और जनभागीदारी बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती हैं। लुण्ड्रा मुख्यालय में इन गतिविधियों का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर पर्यावरण बचाने के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। वहीं लोगों ने स्थानीय जनपद प्रशासन वह स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि
"शायद इस बार पर्यावरण दिवस मनाने की जिम्मेदारी भी पेड़ों पर ही छोड़ दी गई, क्योंकि विभागों को इसकी फुर्सत नहीं मिल सकी।"
