Current Date:02 Jun 2026





लुण्ड्रा -आंगनबाड़ी सहायिकाओं से पैसा वसूली मामले में अभी तक नहीं हो पाई जांच ना कोई कमेटी का गठन उठ रहे कई सवाल

क्या मामला दबाने आवेदकों पर बनाया जा रहा दबाव या फिर विभागीय कर्मचारी की है अंदरूनी सपोर्ट

लुण्ड्रा -आंगनबाड़ी सहायिकाओं से पैसा वसूली मामले में अभी तक नहीं हो पाई जांच ना कोई कमेटी का गठन उठ रहे कई सवाल
राजीव कश्यप सीजी टुडे 24


लुण्ड्रा विकासखंड के कथित तौर पर 24 लाख रुपए के  बहुचर्चित वसुली मामला   अपने आप में कई सवाल खड़े करता है और अब मामला तो दबता सा प्रतीत हो रहा है जिससे निराश व हताश आवेदकों का मानना है कि सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की न्याय व भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल पाना शायद असंभव है कई शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने की वजह से अब आस छोड़ चुके  पीडितों का मानना है कि हमेशा की भांति इसे भी जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर ठंडा बस्ता में डाल मामले को दबा दिया जाएगा एक तरह से आश उम्मीद छोड़ चुके पीडितों  ने प्रशासन व शासन से बगैर किसी दबाव के निष्पक्ष व पारदर्शिता के साथ जांच करने की गुहार लगा तो रहे हैं किंतु उनके गुहार की आवाज  जिम्मेदार अधिकारी के कान तो दूर अगल-बगल तक भी नहीं पहुंच पा रहा है जिससे शिकायत के पखवाड़ा भर बाद भी जांच के नाम पर क्या हुआ आज तक स्पष्ट व  संतोष जनक जवाब नहीं दिया जा रहा है जिससे पीडित अब हताश व निराश नजर आ रहे हैं  

   वही मामला को उजागर होने में 2 महीने लगभग लग जाने से इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता की कहीं वसूली गई रकम की उगाही का हिस्सा न मिलने पर संबंधित स्थानीय या उच्च विभागीय अधिकारी कर्मचारी का अंदरूनी अर्तरकलह तो नहीं जो एक षड्यंत्र के तहत किया जा रहा हो और फिर शिकायतकर्ताओं का यह आराप की यह बात किसी को ना बताना भी सवाल  खड़ा कर रहा है बहरहाल मामला जो भी हो यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा



 फिलहाल बता दे कि यह पुरा मामला
दो महीने पहले मिनी को आंगनबाड़ी में बदलवाने के नाम पर सुपरवाइ‌जर ने महिला बाल विकास अधिकारी का हवाला देते हुए करीब 200 सहायिकाओं से 24 लाख की ठगी की थी। इसके बाद सहायिकाओं ने महिला बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी से इसकी शिकायत की थी, लेकिन कर्रवाई नहीं होने पर सहायिकाओं ने परेशान होकर  कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत कर कार्रवाई करने एसपी को भी ज्ञापन सौंपा था।

शिकायत लेकर पहुंची धनिया कुजूर ने बताया था कि विकासखंड लुण्ड्रा के अंतर्गत ग्राम करौली सेक्टर करौली मांझापारा में मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में पदस्थ हैं। मई माह में सुपरवाइजर नियति सिन्हा और रानी झा ने मिनी आंगनवाड़ी केंद्र को मेन आंगनबाड़ी कराने के बदले झांसा देकर 20 हजार मांगे थे। वहीं पैसे नहीं होने के बात पर सुपरवाइजर ने 12 हजार ले लिए। साथ ही काम होने पर आठ हजार देने की बात कही। इसी तरह से करीब 200 सहायिकाओं से सुपरवाइजर ने 12-12 हजार रुपए की वसूली की थी। साथ ही मिनी आंगनबाड़ी को मेन में बदलने के साथ उनका वेतन भी बढ़ाने का झांसा दिया था। वहीं जब तीन महीने बाद भी काम नहीं हुआ तो सहायिकाओं से साथ धनिया कुजूर भी सुपरवाइजर नियति सिन्हा के पास पैसे की मांग करने पहुंची तो उसे देख लेने की धमकी देते हुए वहां से भगा दिया। साथ ही पैसे देने की बात किसी को नहीं बताने की बात कही थी। यदिबाद मामला सही है तो मानें कि मामले को बढ़ता देख तथा कुछ दिन में मामला दब जाने की नियत से विकासखंड व जिला के अधिकारियों के संरक्षण में नियति सिन्हा ने अपना ट्रांसफर रामानुजगंज करा दिया गया। वहीं अब महिलाएं अपने 12-12 हजार की मांग के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं, पर उनका सुनने वाला कोई नहीं है केवल आवेदन लेकर कार्यवाही के नाम पर आश्वासन दे लगातार उन्हें वापस भेज दिया जा रहा है  जिससे  वे मानसिक आर्थिक रूप से परेशान हैं
    जिस स्तर पर .इनके द्वारा लगातार शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई जा रही है उसके बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं होना और बेखौफ  होकर इतनी बड़ी रकम की खुलेआम लिस्ट बनाकर हस्ताक्षर करते हुए वसूली करने के प्रर्याप्त सबूत के बाद भी सीडीपीओ द्वारा उसकी जानकारी नहीं होना वसूली काल में छुट्टी में रहना और सबूत मांगना यह दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है और यह इस बात को स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि जिला परियोजना अधिकारी या उनके मातहत कर्मचारी का भी इसमें मिली भगत शामिल है वहीं इतनी बड़ी उगाही और क्षेत्र में सुपरवाइजर ऐसे कार्य को बेधड़क होकर खुलेआम करें और जिला परियोजना अधिकारी की अनभिज्ञता विकासखंड के परियोजना अधिकारी को जानकारी ना होना छुट्टी में चले जाना यह दलील भी कई सवाल खड़े कर रहे हैं और उनकी भी संलिप्तता  को उजागर कर रही है यहीं नहीं साथ ही किसी बड़े उच्च अधिकारी वह जनप्रतिनिधियों का कथित तौर पर संरक्षण प्राप्त होना स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुपरवाइजर नियति सिन्हा के अलावा रानी झा लुण्ड्रा फुलकन्या कुजुर  एवं परियोजना कार्यालय  के शासकीय वाहन के ड्राइवर महिला बाल विकास परियोजना का एक वर्षों से पदस्थ कर्मचारी सहित कुछ और लोगों का नाम भी सामने आ रहा है जो उगाही के अलावानौकरी लगवाने का और हटवाने का भी दमखम रखते हैं जिसे जल्द ही हमारे समाचार प्लेटफार्म के द्वारा सबूतमय दस्तावेज के साथ खुलासा किया जाएगा

लगातार अपडेट के लिए बने रहे जल्द होने वाला है और कई भ्रष्टाचार के  खुलासे-----???