Current Date:03 Jun 2026





सरगुजा में अतिशेष समायोजन की सूची को लेकर विवाद गहराया युक्तियुक्तकरण को लेकर जारी अतिशेष सूची में भारी विसंगति

अधिकारियों पर दर्जनों चहेते शिक्षकों को अतिशेष होने के बावजूद बचाने का आरोप

सरगुजा में अतिशेष समायोजन की सूची को लेकर विवाद गहराया युक्तियुक्तकरण को लेकर जारी अतिशेष सूची में भारी विसंगति
सीजी टुडे 24 ब्यूरो राजीव कश्यप

सरगुजा जिले में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी कर दी गई है। अतिशेष समायोजन 3 जून से किया जाना है। स्कूलों के युक्तियुक्तकरण में 1007 शिक्षकों को अतिशेष माना गया है। सरगुजा में अतिशेष सूची जारी होते ही विवाद शुरू हो गया है। अधिकारियों ने दर्जनों चहेते शिक्षकों को अतिशेष होने के बावजूद बचा लिया है।

स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के तहत 227 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण आदेश जारी किया गया है। इनमें ट्राइबल के 187 और एजुकेशन के 40 स्कूल शामिल हैं। स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी कर दी गई है। इसमें करीब 900 शिक्षक अतिशेष की श्रेणी में आ गए हैं। सरगुजा में पहले से जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों के आसपास के स्कूलों में पदस्थ अतिशेष शिक्षक भी इस सूची में शामिल हैं।

सूची को लेकर विवाद, कई शिक्षकों का नाम नहीं

रविवार को अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी होने के साथ ही विवाद शुरू हो गया है। अतिशेष शिक्षकों की सूची में भारी विसंगतियां हैं। सरगुजा जिले में जारी अतिशेष शिक्षकों की सूची में दर्जनों शिक्षकों का नाम नहीं है, जबकि वे अतिशेष हैं।
अतिशेष शिक्षकों की नियमानुसार जानकारी डीईओ कार्यालय द्वारा स्कूलों के प्रिंसिपल और हेडमास्टरों से मांगी गई थी। कई स्कूलों में प्रिंसिपलों ने अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकृत पद से अधिक पदस्थ शिक्षकों का नाम नहीं दिया। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रिंसिपलों की सूची में से नाम गायब कर दिए गए हैं। 

शिक्षक संघों ने कहा-विसंगतिपूर्ण है सूची

अतिशेष शिक्षकों की सूची में विसंगति को लेकर शिक्षक संघों ने भी नाराजगी जताई है। शिक्षक साझा मंच सरगुजा के जिलाध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा कि, प्रथम दृष्टया सूची में भारी गड़बड़ी है। स्वीकृत पदों से अधिक पोस्टिंग के बावजूद कई शिक्षकों का नाम सूची में नहीं है। शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने अतिशेष समायोजन की काउंसलिंग का बहिष्कार करने का ऐलान किया है।

शिक्षक साझा मंच के प्रदेश सह संचालक सुनील सिंह ने सूची में अनियमितता को लेकर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। सुनील सिंह ने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखा है कि, युक्तियुक्तकरण के लिए शिक्षकों की सूची में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। वे इसके विरोध में सोमवार को डीईओ कार्यालय के सामने आमरण अनशन करेंगे

मनमानी को लेकर शिक्षकों में आक्रोश

अतिशेष शिक्षकों की जो सूची प्राचार्यों ने भेजी थी, उनमें से नाम डीईओ कार्यालय से गायब कर दिए गए। हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी में कहीं केमेस्ट्री, तो कहीं जीव विज्ञान को सुविधानुसार मान्य किया गया। इनमें सीनियर देखा जाना था। कॉमर्स के स्थान पर कहीं भूगोल तो कहीं अर्थशास्त्र को मान्य किया गया।
अतिशेष शिक्षकों को बचाने में प्रिंसिपलों ने भी खेल किया है और अपनी सुविधा के अनुसार पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद शिक्षकों का नाम नहीं दिया। शिक्षकों की मानें तो चहेते और पहुंच वाले अतिशेष शिक्षकों को स्कूल और डीईओ कार्यालय जिन स्कूलों के शिक्षक प्रभारी हॉस्टल अधीक्षक हैं,दोनों स्तर पर अतिशेष होने से बचाया गया है।

जिन स्कूलों के शिक्षक प्रभारी हॉस्टल जिन स्कूलों के शिक्षक प्रभारी हॉस्टल अधीक्षक हैं, उन स्कूलों के शिक्षकों को अतिशेष से बाहर रखा गया है, जबकि गाइडलाइन में ऐसा प्रावधान नहीं है।

स्वीकृत पद से अधिक पदस्थापना पर अतिशेष

नए नियमों के तहत स्कूलों में स्वीकृत पद से अधिक जो भी पदस्थापना होगी, वे अतिशेष माने जाएंगे। प्रायमरी शालाओं में 60 की संख्या तक हेडमास्टर के साथ एक शिक्षक और 60 से अधिक बच्चों पर दो शिक्षक पदस्थ होंगे। मिडिल स्कूल में हेडमास्टर सहित तीन शिक्षक होंगे। हाई व हायर सेकेंडरी में स्वीकृत पद से अधिक जितने भी शिक्षक पदस्थ हैं, वे अतिशेष माने जाएंगे।

DEO बोले- विसंगति मिली तो सुधार होगा

सरगुजा DEO अशोक सिन्हा ने कहा कि सूची में दावा-आपत्ति के लिए कल तक का समय दिया गया है। दावा-आपत्ति में बताएं कि कहां दिक्कत है तो विसंगति में सुधार किया जाएगा। जहां पद स्वीकृत है, उससे अधिक शिक्षकों की पदस्थापना पर वे अतिशेष माने जाएंगे। जो बचेंगे उनके ट्रांसफर के लिए राज्य शासन को लिखा जाएगा।

सरकार की नीति अन्यायपुर्ण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पा रही तो दे इस्तीफा या निजी हाथों में सौंप दे स्कूल - टीएस सिंहदेव

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में युक्तियुक्तकरण को लेकर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का बयान सामने आया है। उन्होंने सरकार की नीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नया सेटअप अन्यायपूर्ण है। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। दो शिक्षक पहली से पांचवीं तक 18 कक्षाएं लेंगे, यह अमानवीय सोच है।

सिंहदेव ने कहा कि पहली से आठवीं तक की शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे सकती है तो सरकार से इस्तीफा दें या निजी क्षेत्रों को शिक्षा सौंप दें।