Current Date:28 Jun 2026





बाल विवाह से उत्पन्न होने वाली परिणाम के संबंध में धौरपुर क्षेत्र मेंअयोजित शिविर

बाल विवाह से होता है बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण - सचिव श्री अमित जिंदल ( जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सरगुजा )

बाल विवाह से उत्पन्न होने वाली परिणाम के संबंध में धौरपुर क्षेत्र मेंअयोजित शिविर
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री अमित जिंदल के मार्ग दर्शन मे पी.एल.वी. श्रीमती अनिता कश्यप द्वारा आज धौरपुर क्षेत्र मे शिविर का आयोजन किया गया, वहा उपस्थित बच्चों को उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है जिससे उन पर हिंसा, शारीरिक शोषण तथा यौन शौषण का खतरा बना रहता है, लेकिन इसका प्रभाव लड़कियों पर अधिक पड़ता है। किसी लड़की या लड़के की शादी 18 साल की उम्र से पहले होना बाल विवाह कहलाता है। बाल विवाह में औपचारिक विवाह तथा अनौपचारिक संबंध भी आते हैं, जहा 18 साल से कम उम्र के बच्चे शादीशुदा जोड़े की तरह रहते है। बाल विवाह, बचपन खत्म कर देता है, उसके स्कूल से निकल जाने की संभावना बढ़ जाती है तथा उसके कमाने और समुदाय मे योगदान देने की क्षमता कम हो जाती है। उसे घरेलू हिंसा तथा HIV/ एड्स का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान गंभीर समस्याओं के कारण अक्सर नाबालिग लड़कियों की मृत्यु भी हो जाती है। अनुमानित तौर पर भारत मे प्रत्येक वर्ष, 18 साल से कम उम्र में करीब 15 लाख लड़कियों की शादी हो जाती है जिसके कारण भारत में सबसे अधिक बाल वधुओ की संख्या हैं, जो विश्व की कुल संख्या का तीसरा भाग है। 15 से 19 की उम्र की लगभग 16% लड़कियां शादीशुदा है। हालांकि भारत में कुछ वर्षों में बाल विवाह में कमी जरूर आया है किंतु अभी भी जागरूकता की बहुत अवश्यकता है। श्रीमती अनिता ने वहां बच्चो को बाल विवाह से उत्पन्न होने वाले अन्य बहुत से हानिकारक परिणाम को भी बताया तथा जानकारी प्रदान की।