अम्बिकापुर सीजी टुडे 24, लक्ष्मी नारायण तिवारी
लुण्ड्रा विकासखण्ड स्थित स्वयं प्रगट हनुमान मंदिर लमगांव में सर्व ब्राम्हण समाज ग्रामीण जिला सरगुजा के अध्यक्ष पं. प्रभूनाथ पाण्डेय जी, संरक्षक पं. श्री उमाशंकर उपाध्याय जी के मार्गदर्शन में 10 ब्राम्हण बटुकों का उपनयन संस्कार विधि विधान से कर्मकाण्डी ब्राम्हणों के द्वारा किये गये वेदमंत्रों के गुंजायमान के बीच एवं बटुकों के माता-पिता, स्वजनों, मित्रों एवं सर्व ब्राम्हण समाज के पदाधिकारियाकं एवं सदस्या की ंउपस्थिति में कराया गया।
हालांकि ये संस्कार खासकर ब्राह्मण परिवारों में अपनाए जाते हैं लेकिन पूरे हिंदू समाज के लिए ये संस्कार बेहद अहम हैं। उपनयन संस्कार के दौरान ही जनेऊ धारण कराई जाती है। इसे यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है।
इस क्रम में ब्राह्मण बालक का आठवें साल में उपनयन संस्कार होता हैए क्षत्रिय बालक का 11 वें साल में होता है। जबकि वैश्य बालक का 15 वें साल में उपनयन संस्कार होता है। इस संस्कार में बालक जनेऊ धारण करता है।
उपनयन संस्कार में भिक्षा लेना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भिक्षा मांगने से अहंकार नष्ट हो जाते हैं, व्यक्ति के अंदर विनम्रता आती है और उसे कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए बल भी मिलता है।
मां मुझे भिक्षा दो-जैसे ही कोई बालक अपने उपनयन संस्कार के दौरान यह वाक्य कहता है, उस पल में सिर्फ एक परंपरा ही नहीं निभाई जाती, बल्कि सनातन संस्कृति का गहरा संदेश भी छिपा होता है।यह संस्कार बालक के जीवन का नया अध्याय होता है, जब कोई माता-पिता अपने पुत्र को ज्ञान अर्जित करने के लिए गुरु के पास भेजते हैं, तो उससे पहले उसे दीक्षा दी जाती है और इस प्रक्रिया में भिक्षा लेना अहम भूमिका निभाता है।
उपनयन संस्कार के कार्यक्रम अध्यक्ष एवं संरक्षक के अलावा जिला उपाध्यक्ष पं. भैयालाल तिवारी, जिला सचिव पं. ललित मिश्रा, जिला कोषाध्यक्ष पं. श्री अरूण शर्मा, मिडीया प्रभारी पं. श्री लक्ष्मी नारायण तिवारी, लुण्ड्रा ब्लॉक अध्यक्ष पं. श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय, जिला सदस्य पं. श्री वैद्यनाथ पाण्डेय, पं. श्री राजेश पाण्डेय, पं. श्री नागेश्वर पाण्डेय, पं. श्री आदित्यनाथ पाण्डेय, पं. श्री सुशील दूबे, पं. श्री सुरेश शुक्ला, पं. श्री दिनेश मिश्र, पं. श्री नरेन्द्र पाठक पं. श्री सुनील दुबे एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे।
