Current Date:03 Jun 2026


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*छत्तीसगढ़ में ओबीसी महासभा ने सौंपा व्यापक ज्ञापन: सामाजिक न्याय और समानुपातिक हिस्सेदारी की मांग

24 बिंदुओं में सौंपा ज्ञापन

*छत्तीसगढ़ में ओबीसी महासभा ने सौंपा व्यापक ज्ञापन: सामाजिक न्याय और समानुपातिक हिस्सेदारी की मांग
सीजी टुडे 24  राजीव कश्यप अंबिकापुर

*  छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महासभा ने अपने समुदाय के हितों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर सुनील कुमार नायक  के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, महामहिम राज्यपाल, और माननीय मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित किया गया है। ओबीसी महासभा ने विगत कई वर्षों से हर माह ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को उठाया है, किंतु राष्ट्रीय जनगणना, 2 दिसंबर 2022 को पारित आरक्षण संशोधन विधेयक पर राज्यपाल के हस्ताक्षर जैसे ज्वलंत मुद्दे अभी तक अनसुलझे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू के मार्गदर्शन और प्रदेश उपाध्यक्ष एवं सरगुजा संभाग प्रभारी परशुराम सोनी के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में ओबीसी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, और शैक्षणिक उत्थान के लिए 23 बिंदुओं पर जोर दिया गया है। इस अवसर पर प्रदेश सचिव सुभाष गुप्ता, संभाग मीडिया प्रभारी आदित्य गुप्ता, रघु सोनी, युगल किशोर, संतोष विश्वकर्मा, इंदु कश्यप, मालती यादव, रश्मि सोनी, और रूप नारायण दास सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख बिंदु:

1:-राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी की गणना: ओबीसी महासभा ने मांग की है कि लंबित राष्ट्रीय जनगणना शीघ्र आयोजित की जाए, जिसमें ओबीसी समुदाय की जनसंख्या का स्पष्ट आंकड़ा शामिल हो। छत्तीसगढ़ में ओबीसी समुदाय की जनसंख्या 52% होने का अनुमान है, और आधिकारिक आंकड़ों के अभाव में उनकी समानुपातिक हिस्सेदारी प्रभावित हो रही है।

2:-समानुपातिक आरक्षण: ओबीसी समुदाय को उनकी जनसंख्या के अनुपात में कार्यपालिका, न्यायपालिका, विधायिका, मीडिया, और सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों में आरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है। यह सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज की स्थापना के लिए आवश्यक कदम है।

3:-क्रीमीलेयर और 50% कैपिंग की समाप्ति: क्रीमीलेयर की अवधारणा को परिवार और समाज के लिए विघटनकारी बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की गई है। साथ ही, आरक्षण पर 50% की सीमा को असंवैधानिक करार देते हुए इसे हटाने का अनुरोध किया गया है।

4:-27% ओबीसी आरक्षण और बैकलॉग नियुक्तियाँ: छत्तीसगढ़ में 27% ओबीसी आरक्षण को तत्काल लागू करने और पिछले 32 वर्षों के बैकलॉग नियुक्तियों को भरने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, 2 दिसंबर 2022 को पारित आरक्षण संशोधन विधेयक पर महामहिम राज्यपाल के हस्ताक्षर के लिए शासन से त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।

5:-मंडल कमीशन की अनुशंसाएँ: मंडल कमीशन की सभी सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की गई है, जो ओबीसी समुदाय के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है।

6:-संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल करना: 27% ओबीसी आरक्षण को देश के सभी राज्यों में समान रूप से लागू करने और भारत सरकार द्वारा अध्यादेश पारित कर इसे संविधान की नवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई है।

7:-छात्रावासों का प्रावधान: छत्तीसगढ़ के सभी तहसील मुख्यालयों में ओबीसी के लिए सर्वसुविधायुक्त पोस्ट-मैट्रिक और प्री-मैट्रिक छात्रावास स्थापित करने की मांग की गई है।

8:-स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करना: कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ में स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई है, ताकि किसानों को उचित समर्थन मिल सके।

9:-बैकलॉग नियुक्तियाँ: केंद्र और राज्य की शासकीय संस्थाओं में रिक्त पदों पर बैकलॉग नियुक्तियाँ प्रदान करने की मांग की गई है, जिससे ओबीसी समुदाय के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।

10:-शिक्षा युक्तियुक्तीकरण का निरस्तीकरण: हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा किए गए स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तीकरण को शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई है।

11:-छात्रवृत्ति में समानता: ओबीसी समुदाय के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में विसंगतियों को दूर कर अनुसूचित जाति और जनजाति की भांति समान शर्तों और दरों पर छात्रवृत्ति प्रदान करने की मांग की गई है।

12:-कृषि संकाय की अनिवार्यता: छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में कृषि संकाय को अनिवार्य रूप से संचालित करने की मांग की गई है।

13:-ओबीसी प्रमाण पत्र प्रक्रिया का सरलीकरण: सामाजिक प्रास्थितिक (ओबीसी) प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल करने की मांग की गई है।

14:-बजट में समानुपातिक प्रावधान: ओबीसी के समग्र विकास के लिए राज्य के बजट में आरक्षण के अनुपात में प्रावधान करने की मांग की गई है।

15:-पृथक ओबीसी विभाग की स्थापना: कर्नाटक, केरल, और अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में ओबीसी के लिए पृथक विभाग स्थापित करने की मांग की गई है, क्योंकि वर्तमान में आदिम जाति और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं में ओबीसी की अनदेखी हो रही है।

16:-एट्रोसिटी एक्ट का विस्तार: अनुसूचित जाति और जनजाति की तरह ओबीसी के लिए भी एट्रोसिटी एक्ट लागू करने की मांग की गई है।

17:-किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता: किसानों को समय पर खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वर्ष 2025 की धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू करने की मांग की गई है।

18:-साक्षात्कार प्रक्रिया समाप्त करना: आंध्र प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में राज्य प्रशासनिक सेवा के पदों पर6 साक्षात्कार प्रक्रिया को बंद करने की मांग की गई है।

19:-वनभूमि पट्टा: 2005 से शासकीय भूमि पर कब्जाधारी और निवासरत ओबीसी समुदाय के लोगों को वनभूमि पट्टा प्रदान करने की मांग की गई है।

20*अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण: संविदा, प्लेसमेंट, मानदेय, दैनिक वेतन भोगी, और ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की गई है।
21:-बर्खास्त बी.एड शिक्षकों का समायोजन: बर्खास्त बी.एड सहायक शिक्षकों को सरकार के आश्वासन के अनुसार तत्काल विभाग में समायोजित करने की मांग की गई है।

22:-अंशकालीन स्वीपर का पूर्णकालिक करना: स्कूलों में कार्यरत अंशकालीन स्वीपरों को पूर्णकालिक करने की मांग की गई है।

23:-मध्यान भोजन रसोइयों के मानदेय में वृद्धि: 

केंद्र सरकार की "मोदी की गारंटी" के तहत मध्यान भोजन रसोइयों के मानदेय में 50% वृद्धि की मांग की गई है।

सामाजिक न्याय की दिशा में कदम

ओबीसी महासभा ने अपने ज्ञापन में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था की "रीढ़ की हड्डी" माने जाने वाले ओबीसी समुदाय को सामाजिक न्याय प्रदान करना समतामूलक समाज की स्थापना के लिए आवश्यक है। यह ज्ञापन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में ओबीसी समुदाय के लिए नीतिगत बदलाव की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

नेतृत्व और एकजुटता

ज्ञापन सौंपने के इस कार्यक्रम में ओबीसी महासभा के सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। राधेश्याम साहू ने कहा, "हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक ओबीसी समुदाय को उनका हक नहीं मिल जाता।" परशुराम सोनी ने जोर देकर कहा कि शासन को इन मांगों पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ओबीसी समुदाय का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

भविष्य की दिशा

ओबीसी महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। यह ज्ञापन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में ओबीसी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सामाजिक और आर्थिक न्याय की दिशा में उनकी लड़ाई को और मजबूत करता है।