सरगुजा संभाग के अग्रणी महाविद्यालय में से एक शासकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग द्वारा 9 अगस्त 2023 को विश्व मूल निवासी दिवस के उपलक्ष्य।में व्याख्यान एवं स्थानीय लोक पारंपरिक व्यंजनों की प्रस्तुति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र मानवशास्त्र के छात्र छात्राओं द्वारा निर्मित सरगुजा अंचल की पारंपरिक व्यंजन रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अपर संचालक सरगुजा संभाग डॉ रिजवानुल्लाह ने आदिवासी समाज को मानव सभ्यता एवं विकास के निर्माता के रूप में बताया साथ ही उन्होंने कहा की आदिवासी समाज से हमें यह सीखना होगा की अपनी संस्कृति व परंपरा का निर्वहन तथा संरक्षण कैसे किया जाता है।

भूगोल विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ आर. के. जायसवाल जी ने भी आदिवासी समाज हेतु योजना निर्माण में उनकी आवश्यकताओं एवम परंपरा को ध्यान में रखने की बात कही, ताकि योजनाएं सफल हों सके। समाजशास्त्र विभाग की प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रतिभा सिंह जी ने भी कहा की वर्तमान समय में आधुनिकता एवं विलासिता की जीवन से परे, ये मूलनिवासी किस प्रकार से अपनी प्राकृतिक परिवेश में आज भी सामंजस्य एवं अनुकूलन स्थापित कर अपनी संस्कृति एवं परंपरा के सारथी बने हुए हैं।
मानवशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष श्रीमती ज्योति लकड़ा जी ने भी आदिवासी समाज के बच्चों एवं युवकों को विकास की मुख्य धारा में सम्मिलित होकर,अपनी संस्कृति की परंपराओं को आने वाली पीढ़ी को दृष्टिगत रखते हुए कार्य करें रहे तथा ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से संरक्षित करने की बात कही।
कार्यक्रम में मानवशास्त्र के विद्यार्थियों में कुमारी श्रुति गुप्ता, कु.रुचिका एक्का, कु. काजल द्वारा भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए गए। कार्यक्रम में कु. आंचल सोनी, कु.श्रुति गुप्ता, कु.रुचिका एक्का, कु. प्रतिभा, कु. रिया पासवान, कु.तुलसी, कु. मधुमंडल, कु. रवीना, कु.काजल द्वारा पारंपरिक व्यंजनों में इडहल सब्जी, सरसों साग की सूक्ति, आम की चटनी, उसना भात, खुरमी, बरा आदि व्यंजनों की प्रस्तुति की गई।
कार्यक्रम का संचालन, मानवशास्त्र की अतिथि व्याख्याता डॉ रश्मि इंगले द्वारा किया गया एवम आभार प्रदर्शन अतिथि व्याख्याता मो. तफशीर आलम द्वारा किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तुति एवं तैयारी में अतिथि व्याख्याता शुभम् पोद्दार एवं मानवशास्त्र के छात्र छात्राओं का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में मनोविज्ञान की प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. तृप्ति बिश्वास एवं हिंदी विभाग की प्राध्यापक डॉ. विजयलक्ष्मी शास्त्री उपस्थित रहे।
