Current Date:03 Jun 2026





वरिष्ठ नेताओं को साधने में भाजपा के शीर्ष नेता हो रहे नाकाम केंद्रीय नेतृत्व को संभालनी होगी भागडोर वर्ना चुनाव में खा सकते हैं धोखा?

जनसंघ के समय से जुड़े नंदकुमार साय जशपुर बस्तर सरगुजा सहित प्रदेश के कई जिलों में रखते हैं खासा प्रभाव

वरिष्ठ नेताओं को साधने में भाजपा के शीर्ष नेता हो रहे नाकाम केंद्रीय नेतृत्व को संभालनी होगी भागडोर वर्ना चुनाव में खा सकते हैं धोखा?
सीजी टुडे 24 ब्यूरो राजीव कश्यप


भाजपा के आधार स्तंभ में से एक माने जाने वाले तथा जनसंघी  कद्दावर नेता छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा आदिवासी चेहरा कहे जाने वाले पूर्व विधायक, पूर्व राज्य सभा सांसद नंदकुमार साय के पार्टी छोड़ने का समाचार जंगल में आग की तरह राजनैतिक गलियारों के देश प्रदेश में फैल चुका है। अब लगभग स्पष्ट होते जा रहा है कि बड़े-बड़े दिग्गज नेता जो जनसंघ से भाजपा तक पौधा को बरगद का पेड़ बनाने के लिए तन मन धन से अपना सहयोग किए कई यातनाएं वह संघर्ष के दौर से गुजर भारतीय जनता पार्टी को आज सबसे बड़ी पार्टी की मुकाम तक लाने में अपनी भूमिका अदा किए हैं वे अब लगातार उपेक्षित व पार्टी की नीति रिति से आहत हो रहे हैं। 15 वर्ष के भाजपा शासनकाल में भी नंदकुमार साय सहित विगत आदिवासी नेताओं को और पिछड़ा वर्ग के दिग्गज भाजपा नेताओं को जो एक षड्यंत्र के तहत या तो पार्टी में किनारे की पंक्ति में ला खडा कर  दिया गया या उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया कुछ बच गए हैं वह भी  अंदर ही अंदर शायद  घुटन महसूस कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा का नेतृत्व लगभग 15 साल भाजपा शासनकाल में जो ताकतवर रहे वैसे ही लोग स्थापित हैं जिससे भी लोग घुटन महसूस कर रहे हैं बहरहाल  यदि छत्तीसगढ़ में भाजपा को अपनी सरकार बनानी है तो अभी भी देरी नहीं हुई है कहते हैं जब जागे तभी सवेरा के तर्ज पर बगैर कोई समय गवाएं  तत्काल  केंद्रीय नेतृत्व को  छत्तीसगढ़ के मामले को संज्ञान में लेंते  हुए एक रणनीति बना वरिष्ठो से लेकर कनिष्ठो तक को साधने व एकजुटता लाने आगे आते हुए बागडोर  केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व को संभालना होगा। 
एक कहावत है कि एक छोटी सी चिंगारी को यदि  समय रहते बुझाई नहीं जाए तो वह पूरे जंगल हो भस्मी भूत कर सकता है इसे हल्के में ना लेते हुए गंभीरता पूर्वक कार्य करने की आवश्यकता है वर्ना जैसे दीमक लग चुके  महल को दीमक से मुक्त नहीं किया गया तो कब पूरा महल भरभरा कर गिर जाएगा पता ही नहीं चलेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कार्यकर्ताओं में आज भी यह चर्चा का विषय है कि भ्रष्टाचार करने वाले लोग जो सरकार में थे आज वह संगठन पर काबिज है और कुछ बाहर से संगठन को कंट्रोल कर रहे हैं यह सब
पर यदि आलाकमान बंद कराने में सफल नहीं होती है तो यह चिंता करने वाली विषय होगी कि 2023 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव हैं और 2024 में लोकसभा के भी चुनाव नज़दीक हैं और यह कहना कतई अनुचित वह निरर्थक नहीं होगा कि भाजपा छत्तीसगढ में मात्र व मात्र मीटिंग तक ही सीमित है। और वह भी यह कहें कि मीटिंग भी केवल कागज पूर्ति दिखाने के लिए तो कोई झूठी बात नहीं है जमीनी स्तर पर आज भाजपा की कोई कार्य व गतिविधि सक्रिय रूप से नजर नहीं आ रही है जो यह विपक्ष की भूमिका में रहकर आनी चाहिए कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता की हद तो तब हो जाती है जब छत्तीसगढ़ प्रभारी अंबिकापुर के दौरे में आते हैं और कार्यकर्ताओं से बकायदे मुखातिब होकर मीटिंग के शुरू होने से पहले ही परीचात्मक बैठक में जब उनसे उनके पद हुआ पद के दायित्व तथा कार्य के बारे में पूछा जाता है तो पद के कार्य तो दूर अपना पद तक को बताने में कुछ एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता अक्षम होते हैं ऐसे में मेरा बूथ सबसे मजबूत कैसे होगा जबकि कागजों की आंकड़ों को देखा जाए तो बुथ से लेकर पन्ना प्रमुख तक की सक्रिय कार्य को बताने में संबंधित मंडल के अध्यक्ष महामंत्री पीछे नहीं हटते हैं