Current Date:01 Jun 2026





भाजपा सरगुजा द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर “एकता पदयात्रा” का भव्य आयोजन

अंबिकापुर से परसा तक किया गया पदयात्रा

भाजपा सरगुजा द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर “एकता पदयात्रा” का भव्य आयोजन
सीजी टुडे 24 अंबिकापुर
भारत के लौह पुरुष, राष्ट्र निर्माता और स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी सरगुजा द्वारा अंबिकापुर से परसा तक भव्य “एकता पदयात्रा” का आयोजन किया गया।
यह ऐतिहासिक पदयात्रा सांसद चिंतामणि महाराज के नेतृत्व में तथा भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की उपस्थिति में प्रारंभ हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ राम मंदिर प्रांगण, अंबिकापुर से हुआ, जहाँ भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएँ और बड़ी संख्या में आमजन श्रद्धा और उत्साह के साथ एकत्र हुए।
पदयात्रा मल्टीपरपज स्कूल मैदान से होकर शंकर घाट स्थित शिव मंदिर पहुँची, जहाँ भगवान शिव के दर्शन कर मंदिर परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। मार्ग में शासकीय माध्यमिक शाला असोला में आमसभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने सरदार पटेल के जीवन, आदर्श और देश की एकता में उनके अतुलनीय योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।

आमसभा में सांसद चिंतामणि महाराज ने अपने विस्तृत उद्बोधन में कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि भारत के वास्तविक शिल्पकार थे। महात्मा गांधी के सबसे विश्वसनीय सहयोगी के रूप में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज़ादी के बाद जब भारत सैकड़ों रियासतों में बँटा हुआ था, तब सरदार पटेल ने लौह इच्छाशक्ति और असाधारण कूटनीति से 562 रियासतों का भारत संघ में विलय कराया।

जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर जैसी रियासतों को भारत में मिलाने के लिए उन्हें जबरदस्त विरोध और षड्यंत्रों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और निर्णायक रवैये से भारत को खंडित होने से बचाया। जूनागढ़ की नवाबी हठ को शांत कर उन्होंने जनता की इच्छा के आधार पर रियासत को भारत में मिलाया, हैदराबाद के निज़ाम की अलगाववादी सोच के विरुद्ध ‘ऑपरेशन पोलो’ चलाकर अखंड भारत का सपना साकार किया, और कश्मीर मुद्दे पर भी देश की एकता के लिए ठोस रुख अपनाया।

दुर्भाग्य है कि इतिहासकारों ने उनके योगदान को उतनी प्रमुखता नहीं दी जितनी देनी चाहिए थी। सरदार पटेल का नाम भारत के संविधान की आत्मा में अंकित है, क्योंकि उन्होंने न केवल देश को जोड़ा, बल्कि उसे एक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया। आज जब हम मजबूत और अखंड भारत की बात करते हैं, तो उसके पीछे सरदार पटेल की दूरदर्शिता की नींव है।”

भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया ने कहा कि “सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन त्याग, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का उदाहरण है। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर उन्होंने सत्य और न्याय के बल पर भारत की राजनीति को नई दिशा दी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में गांधीजी के ‘सत्याग्रह’ सिद्धांत को जनता के बीच पहुँचाया और बाद में देश की प्रशासनिक व्यवस्था को स्थायित्व प्रदान किया।
आज के युवाओं को सरदार पटेल के जीवन से यह सीखनी चाहिए कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्चे राष्ट्रप्रेम से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने देश की अखंडता के लिए जिस कठोर निर्णय क्षमता का परिचय दिया, उसी का परिणाम है कि आज भारत एक संगठित राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर खड़ा है।”

लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि रियासतों के विलय का कार्य इतिहास का सबसे जटिल अध्याय था, जिसे सरदार पटेल ने अपने प्रखर नेतृत्व से पूर्ण किया। उस समय कई राजा-महाराजा अपने-अपने स्वतंत्र अस्तित्व की बात कर रहे थे, परंतु पटेल जी ने उन्हें समझाया कि स्वतंत्र भारत की शक्ति उसकी एकता में है।

उन्होंने कूटनीति और आवश्यक होने पर सख्ती दोनों का संतुलित प्रयोग किया। हैदराबाद की निज़ाम रियासत में जब देशविरोधी ताकतें हावी हुईं, तब सरदार पटेल ने ‘ऑपरेशन पोलो’ चलाकर एक निर्णायक संदेश दिया कि भारत की अखंडता से कोई समझौता नहीं होगा। उनके ऐसे अदम्य साहस के कारण ही भारत की सीमाएँ सुरक्षित हैं और हमारी एकता अटूट बनी हुई है।”

इस अवसर पर महापौर मंजूषा भगत ने कहा  कि सरदार पटेल ने न केवल भारत की सीमाओं को जोड़ा, बल्कि भारत के हृदय को एक सूत्र में बाँधा। उन्होंने प्रशासनिक ढांचे को संगठित कर देश में एकता की भावना को जीवन्त किया। महिलाएँ भी यदि सरदार पटेल के समान दृढ़ निश्चय और देशभक्ति को अपने जीवन में अपनाएँ, तो समाज और राष्ट्र दोनों और अधिक सशक्त बन सकते हैं।
आज आवश्यकता है कि हर नागरिक सरदार पटेल की विचारधारा — ‘राष्ट्र पहले’ — को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाए।”

जिला पंचायत सदस्य श्रीमति दिव्या सिंह सिसोदिया ने कहा कि  सरदार पटेल का योगदान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। उन्होंने भारत के ग्रामीण समाज, किसानों और आम नागरिकों को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गर्व का भाव सिखाया।
उन्होंने दिखाया कि सच्चा नेतृत्व वह होता है जो कठिनाइयों में भी राष्ट्र के हित को सर्वोपरि रखे। आज की पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और भारत की एकता और अखंडता के लिए उसी निष्ठा के साथ कार्य करना चाहिए।”
पदयात्रा के दौरान परसा मोड़ के पास भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धान कटाई कर श्रम की गरिमा और ग्रामीण जीवन के सम्मान का संदेश दिया। इसके बाद संत गहिरा गुरु की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया गया।
रास्ते में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया गया, जबकि सरगुजिहा लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पदयात्रा को जनउत्सव का रूप दे दिया। जगह-जगह ग्रामीणों ने पदयात्रियों का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया।

पदयात्रा का समापन शासकीय माध्यमिक शाला परसा प्रांगण में हुआ, जहाँ भव्य जनसभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मांदर की थाप पर भाजपा नेता, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता भी उत्साहपूर्वक थिरकते नजर आए।
मंच संचालन जिला महामंत्री विनोद हर्ष ने किया । 
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद, विधायक, पदाधिकारी एवं सभी पदयात्री परसा स्कूल परिसर में ही रात्रि विश्राम करेंगे।
इस अवसर पर मेजर अनिल सिंह, अम्बिकेश केशरी , विनोद हर्ष , अरुणा सिंह, मधुसूदन , शुक्ला , विकास पांडेय, फूलेश्वरी पैकरा, निश्चल प्रताप सिंह , इंदर भगत, मधु चौदहा, वैभव सिंह देव , रूपेश दुबे, अनिल जयसवाल , सोनू तिग्गा , सोमनाथ सिंह , कमलेश तिवारी , मनोज कंसारी , विकास वर्मा , जातीन परमार , नीलम रजवाड़े , संतोष जायसवाल, शैलू सिंह ,  अजय  सोनी, प्रियंका चौबे , अनीश सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, आमजन , जनप्रतिनिधि, भाजपा कार्यकर्ता पदाधिकारी उपस्थित रहे ।