Current Date:12 Sep 2026





करमा उत्सव में झलकी छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दी बधाई

करमा पर्व प्रकृति, कृषि परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक: मंत्री श्री राजेश अग्रवाल

करमा उत्सव में झलकी छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दी बधाई
अम्बिकापुर 22 अगस्त 2026/   नगेसिया किसान समाज द्वारा तुर्रापानी अंबिकापुर में आयोजित करमा उत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने करमा पर्व की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर पारंपरिक लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव के माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि करमा पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। यह प्रकृति के प्रति आस्था, कृषि परंपराओं, सामुदायिक भावना और सामाजिक एकता का प्रतीक है। करमा उत्सव के माध्यम से हमारी लोक संस्कृति के गीत, संगीत, नृत्य और परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के साथ समाज में आपसी भाईचारे और एकजुटता की भावना को भी मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति और परंपराएं हमारी जड़ों से जुड़ी हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इन्हें संजोना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते समय में अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। हमारी नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित होगी, तभी वह अपनी जड़ों और अपनी पहचान को बेहतर ढंग से समझ सकेगी।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति अपनी विशिष्ट परंपराओं, लोकनृत्यों, लोकगीतों और प्रकृति से गहरे जुड़ाव के लिए देश-दुनिया में विशेष पहचान रखती है। करमा जैसे पारंपरिक उत्सव इस सांस्कृतिक विविधता की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोककला, लोक संस्कृति और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक आयोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं हमारी सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर, इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व