अंबिकापुर: सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा इसका उदाहरण हैं। उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं और परिवार में तीन बच्चे हैं। सीमित आय में परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ बच्चों का पालन-पोषण करना उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सरिता घर पर सिलाई का काम करती हैं और इस माध्यम से परिवार की आय में योगदान देती हैं। सिलाई कार्य को जारी रखने के लिए उन्हें समय-समय पर धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी पड़ती है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि का उपयोग वे इन जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। सरिता का उदाहरण बताता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके कौशल और मेहनत को स्वरोजगार से जोड़ने में उपयोगी हो सकती है।
सरगुजा जिले के ये उदाहरण बताते हैं कि जब योजनाओं से मिलने वाली सहायता लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ती है, तो वह उनके लिए आगे बढ़ने का आधार बन सकती है। सौर ऊर्जा से घरेलू खर्च में राहत, छात्रवृत्ति से शिक्षा को संबल, उद्यमिता से रोजगार और महिला सशक्तीकरण से परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार-ये सभी प्रयास जिले में आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की संभावनाओं को मजबूत करते हैं।
